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08 कविता :- चाहे मंदिर में ज्योत जलाओ।

चाहे मंदिर मेँ जोत जलाओ ।
चाहे मस्जिद मेँ कलमा गाओ ।।
चाहे गुरुद्वारे मे गुरवाणी का पाठ करो ।
चाहे चर्च मे प्रभू ईसा को याद करो ।।
हमे कोई आपत्ति नही, ये अब तुम्हे जानना होगा ।
भारत मे रहना है तो वन्दे मातरम गाना होगा ।।
2
देश है तो हम हैं हम हैं तो धर्म है ।
देश के आगे धर्म का ओहदा बहुत कम है ।।
अपनी मजहबी सोच से मुँह मोडना होगा ।
देश के स्वर से स्वर जोड़ना होगा ।।
भारत के हर सपूत को अपना मुँह खोलना होगा ।
हर देशवासी को भारत माँ की जय बोलना होगा ।।
3
शहीदो ने जय हिन्द बोलकर जाने कितने कोड़े खाये थे ।
जय हिन्द बोलने पर अंग्रेजो ने जाने कितने सितम ढाऐ थे ।।
उनके लहु के एक एक क़तरे का कर्ज़ चुकाना होगा ।
मजहबी कट्टरपंथी सोच को खुद से दूर भगाना होगा ।।
तुम सबसे पहले एक भारतीय हो मन मस्तिष्क मे लाना होगा ।
राष्ट्र धर्म के पालन के लिए वंदे मातरम गाना होगा ।।
4
चाहे मंदिर की घंटी बजाओ या ना बजाओ ।
चाहे मस्जिद मे सर झुकाओ या ना झुकाओ ।।
चाहे गुरुद्वारे के द्वार तक जाओ या ना जाओ ।
चाहे चर्च मे ईसा को मनाओ या ना मनाओ ।।
पर अब तुम्हे अपना ये हठ धर्म छोड़ना होगा ।
भारत मे रहकर भारत माँ की जय बोलना होगा ।।

कुमार मनोज
7503059322
9871784593

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