भावनाऔ की मन मे बहती अनंत सरिता।
पर तूझे शब्द नही दे पाता मै कविता।।
असमंजस मे रहती ये मन सदा।
वक्त भी तो मिलती है यदाकदा।।
नैन से नैन मिले और इज्हारे महोब्बत हो।
ये जरुरी तो नही हर भावनाऐ शब्द हो।।
जिन्दगी अब तक समझ गई होगी मुझको।
शब्द के भाव भावनाऔ के शब्द को।
जिस वक्त ने सिखलाया मन मे घाव बनाना।
उसी वक्त सिखलाता है मनके घाव मिटाना।
मै ढिढोरा नही पिटता तेर शब्द की कविता।
बस मन मे रहने दो भावनाऔ की सरिता।।
पर तूझे शब्द नही दे पाता मै कविता।।
असमंजस मे रहती ये मन सदा।
वक्त भी तो मिलती है यदाकदा।।
नैन से नैन मिले और इज्हारे महोब्बत हो।
ये जरुरी तो नही हर भावनाऐ शब्द हो।।
जिन्दगी अब तक समझ गई होगी मुझको।
शब्द के भाव भावनाऔ के शब्द को।
जिस वक्त ने सिखलाया मन मे घाव बनाना।
उसी वक्त सिखलाता है मनके घाव मिटाना।
मै ढिढोरा नही पिटता तेर शब्द की कविता।
बस मन मे रहने दो भावनाऔ की सरिता।।
Comments
Post a Comment