एकाढ़
कोशी किनारे मोरा गाँव,
कभी धुप कभी छाँव।
एक तरफ बस्ती, और खेत!
एक तरफ,रेत ही रेत।!
कोशी तटबंध किनारे हनुमान थान।
मध्य कृष्णा-घर भेरब स्थान।!
एक तरफ माँ ज्वालामुखी-घर।
एक तरफ धर्मराज गहबर।
गाम के मध्य मुख्य डगर।
सबका घर अगल बगल।।
भिन्नता का रंग समाया।
सब ने इसे सजाया।
गाम छोटा ही सही पर अपना
एक शान हो।
सहरसा बिहार मे
ही नही भारत मे
पहचान हो।।
कोई कश्मिर को
जन्नत जाने।
हम तो एकाढ को
स्वर्ग माने।
(c)कुमार मनोज
09871784593
कोशी किनारे मोरा गाँव,
कभी धुप कभी छाँव।
एक तरफ बस्ती, और खेत!
एक तरफ,रेत ही रेत।!
कोशी तटबंध किनारे हनुमान थान।
मध्य कृष्णा-घर भेरब स्थान।!
एक तरफ माँ ज्वालामुखी-घर।
एक तरफ धर्मराज गहबर।
गाम के मध्य मुख्य डगर।
सबका घर अगल बगल।।
भिन्नता का रंग समाया।
सब ने इसे सजाया।
गाम छोटा ही सही पर अपना
एक शान हो।
सहरसा बिहार मे
ही नही भारत मे
पहचान हो।।
कोई कश्मिर को
जन्नत जाने।
हम तो एकाढ को
स्वर्ग माने।
(c)कुमार मनोज
09871784593
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