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शेर

इश्क, मोहोबत, प्यार, वफा, सब मालूम पर जाते हैं!
            जब सर के बचे खुचे बाल  जाते हैं।।

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😂😂😂😂😝😝😝 स्कूल में बडी दुविधा होती रही थी जब : 1.बायोलॉजी के टीचर ने पढाया : सेल मतलब 'शरीर की कोशिकाएँ'। 2.फिजिक्स के टीचर ने पढाया : सेल मतलब 'बैटरी', 3.इकोनॉमिक्स के टीचर ने पढाया: सेल मतलब 'बिक्री', 4.हिस्ट्री के टीचर ने पढाया : सेल मतलब 'जेल', 5.अंग्रेजी के टीचर ने पढाया: सेल मतलब 'मोबाइल', टीचरों के पढ़ाई पर भरोसा करना छोड़ दी भाई साब, यह सोचकर कि जिस स्कूल में पांच शिक्षक एकमत नहीं है उस स्कूल में पढ़ कर क्या होगा ? और  *सच्चा ज्ञान मिला जब पत्नी ने बताया सेल मतलब 'डिस्काउंट' !!* 😆😝

07 कविता: मैंने पीना कब सीखा था।

मैने पीना कब सीखा था? मैने जीना कब सीखा था? एक बोतल जो टूट गयी, तो महफ़िल सारी रूठ गयी॥ ये दुनिया एक महफ़िल है और हम इसके मेहमाँ हैं, हैं कुछ साक़ी और कुछ आशिक़ उम्मीदें हैं ,कुछ अरमाँ हैं॥ आज अगर कुछ शब्द बहे, तो आखिर दिल से कौन कहे, प्यार वफ़ा कसमें और वादे अब इनकी पीड़ा कौन सहे? पीड़ा को इतिहास बता कर पीना मैने अब सीखा है। शायद लोग और कुछ कह दें पर जीना मैने अब सीखा है॥

18 कविता :- कोसी किनारे मेरा गौव

एकाढ़ कोशी किनारे मोरा गाँव, कभी धुप कभी छाँव। एक तरफ बस्ती, और खेत! एक तरफ,रेत ही रेत।!   कोशी तटबंध किनारे हनुमान थान। मध्य कृष्णा-घर भेरब स्थान।! एक तरफ माँ ज्वालामुखी-घर। एक तरफ धर्मराज गहबर। गाम के मध्य मुख्य डगर। सबका घर अगल बगल।। भिन्नता का रंग समाया। सब ने इसे सजाया। गाम छोटा ही सही पर अपना एक शान हो। सहरसा बिहार मे ही नही भारत मे पहचान हो।। कोई कश्मिर को जन्नत जाने। हम तो एकाढ को स्वर्ग माने। (c)कुमार मनोज 09871784593