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26 कविता : आज का अर्जुन

अर्जुन ने कहा
श्री कृष्ण से..
हे प्रभु आईये।
जडा
कलयुग मे भी
रासलीला दिखाईये।
श्री कृष्ण
पाकर
अर्जुन का संदेश,
देखकर
आधुनिक परिवेश।
आगया
उनमे आबेश,
दिया
अर्जुन को उपदेश।.

ये क्या अर्जुन
कलयुग मे,
कैसी मैरी
लीला कि तैयारी है?
गोपिऔ के
खुले बदन,
गुवालाऔ पर
कपडा भाडी है।
सौच स्नान
चारदिवारी मै,
प्रेम आलिगंन
खुले मे
करने की तैयारी है?
शादी ब्याह से
परहेज करे यहाँ,
यहाँ डेटिग सैटिग की
मारामारी है।

घौर आधुनिकता
ये नर नारी
हमे दिखाते है।
नर से नर,
नारी से नारी
कैसा संबंध
बनाते है।
दाम्यपत जीवन मे
कोई किसी का
साथ नही
निभाते है।
पत्नि अपनी
पति बदले,
पति
दुसरी पटाते है।

डेटिग सैतिग की
उपज ये,
एबोसन करवाते है।.
अपने कुल का
कुलभुसन,
अनाथालय से लाते है।
कौन किसका
माँ बाप, भाई बहन,
कौन किसके सगे?
पशु पक्षी जैसी
जीवन शैली
इसे ये
आधुनिकता कहे।

कहे "ठाकुरजी"
अर्जुन से "
क्यो मुझे
ऐसी रासलीला
करने बुलाया है"
मेरी प्रेम की
परिभाषा का
तुमने
गलत अर्थ
लगाया है।

धिकार है
धिकार है
धिकार है।
हे मंगल चाँद पर
जाने वाले मानवो,
तेरी
ये आधुनिकता
बेकार है।
बेकार है
बेकार है।
(c) कुमार मनोज
 9871784593

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