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10 कविता:- मन की बात।

मै जन की बात करता रहा
वो धन की बात समझती रही .

मै गन की बात करता रहा
वो रण की बात समझती रही .

अब ओर उसे कैसे समझाता मै.....

मै "मन की बात" करता रहा
वो फन की बात समझती रही .

✍के मनोज ठाकुर
09871784593
07503059322

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