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17 कविता:- जडा पीली है।

जडा पीली है।
1
जो सखी रंगो से सदा बचती थी।
जो ओरो से  जूदा दिखती थी।।
आज उसने भी खेली होली है।
आज उसकी भी चूँदर पीली है।।
2
होली मे सजती समरती दूलहनियाँ।
रंगो से रंगो की बनती पहेलियाँ।।
आज मायके के लिए पलके गीली है।
आज उसने भी गम की घुट पीली है।।
3
जब ससूरा  सास के साथ खेले होली।
बदमा के साथ वो भी मदहोश होली।।
उसने देवरा की मुँह करि नीली हैं।
लो अब उसकी भी बदन पीली है।
4
जब सखी जैठ ने फेकी रंग उसपर।
वो खिलखिलाई सखी ........

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