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01 कविता :- मैंने लिखना केसे सीखा

जिसके पास मै जाता हुँ,
जो भी मेरे पास आते है।.

बस ये सबाल कर जाते है।
जवाब माँगने लग जाते है।

मै उन पुछनवालो से,
नही घवराता हुँ !
खुले शब्दो मे,
जवाब दे आता हुँ !

होगा आपके मन मे भी,
सवाल तिखा ।
मैने कविता लिखना कैसे सीखा ?

लडकपन मे देखी एक छवि।
जिसने साधारण मनुष्यं
को बनाया कवि।
प्रथम सनेह मे सनते रहे।
उसे देख देख कविता बनते रहे।

यू ही चलता रहा जीवन।
और भावनाऔ को,
शब्द देता रहा कविमन।

अव वो छवि तो विछड गई है।
जीवन बगीया उजर गई है।

पर ना उदास हुँ ना हतास हुँ,
अब मै अपना स्वम प्रकाश हुँ।

शब्दो का धन मेरे पास है।
कोई धनी नही मुझ सरीखा

अव तो आप समझ गये होँगे
मैने कविता लिखना कैसे सीखा।.


(C) कुमार मनोज
09871784593

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