जब पायल छनक जाती थी।
मन घायल कर जाती थी।
तब उनकी नजरो से,
मेरी नजर मिल जाती थी।
लडकपन का एक, सफर था हमारा।
सामने आकर बैठा, एक चेहरा प्यारा।
हमारे बीच, रति भर की दूरी थी।
अगर मै साँस भी लु,तो वो मैरी थी।
कभी धरकने तेज होती,
कभी मंद।
मन मे हो रही थी, हुदहुदी सी जंग।
तेज हवा उनके मुखरे से, जुल्फो को हिलाती थी।
जुल्फे कभी न्यनो तो कभी गालो को सहलाती थी।
कभी लालीदार होठो को छु जाती थी।
कभी मेरे साँसो से लहराती थी।
जुल्फो को बाँध रखी थी,
खुबशुरत डोर से।
तुम रिस्ते चलाने जाते.
तो हाँ कह देते,मेरी ओर से।
मुखरे की बात,कैसे बताऊँ?.
दिल करता था,उसकी रोशनी मे,जीवन बिताउँ.।।
चली गई अपनो के,हाथो मे डाले हाथ।
खत्म हुआ,कुछ घन्टो का साथ।
(C) कुमार मनोज
09871784593
मन घायल कर जाती थी।
तब उनकी नजरो से,
मेरी नजर मिल जाती थी।
लडकपन का एक, सफर था हमारा।
सामने आकर बैठा, एक चेहरा प्यारा।
हमारे बीच, रति भर की दूरी थी।
अगर मै साँस भी लु,तो वो मैरी थी।
कभी धरकने तेज होती,
कभी मंद।
मन मे हो रही थी, हुदहुदी सी जंग।
तेज हवा उनके मुखरे से, जुल्फो को हिलाती थी।
जुल्फे कभी न्यनो तो कभी गालो को सहलाती थी।
कभी लालीदार होठो को छु जाती थी।
कभी मेरे साँसो से लहराती थी।
जुल्फो को बाँध रखी थी,
खुबशुरत डोर से।
तुम रिस्ते चलाने जाते.
तो हाँ कह देते,मेरी ओर से।
मुखरे की बात,कैसे बताऊँ?.
दिल करता था,उसकी रोशनी मे,जीवन बिताउँ.।।
चली गई अपनो के,हाथो मे डाले हाथ।
खत्म हुआ,कुछ घन्टो का साथ।
(C) कुमार मनोज
09871784593
Comments
Post a Comment