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05 कविता :- करोड़ों का सवाल


करोडो का सवाल।

एक बार हम टीवी देख रहे थे जला के मोमबती।

कार्यक्रम आ रहा था, कौन बनेगा करोडपति।
अमीत जी सवाल पे सवाल किये जा रहे थे।
होटसीट वाला हर सवाल का जवाब दिये जा रहे थे।
उस दिन का कार्यक्रम हमे नही भाया।
जब सात करोड का एक सवाल आया।
हाँट सीट पर बैठी भी जवाब नही दे पाई।
तब जनता की औपेनियन की बारी आई।
सवाल करोडो का, मुश्किल, पर नेक था।
ए बी सी डी मे से जवाब कोई एक था।
संनाटे के बीच जनता का औपेनियन आई।
पचपन प्रतिशन जनता ने ए को सही बताई।
ए को जवाब के रुप मे किया गया लाँक।
कमप्युटर महोदय के जाँचने पर लगा साँक।
कमप्युटर से निकली एक खतरनाक साँग।
बहुमत से निकला जनता का औपेनियन  राँग।
मेरा कहने का मतलब समझो मेरे भाई।
कभी कभी गलत हो जाते है जनता की राय।
अब जनता के लिए ना कोई सवाल है।
बस पाँच साल केजरिवाल ही केजरिबाल है।
K Manoj Thakur
9871784592

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