धर्म आज व्यापार हो गया। कृपा आज कारौवार हो गया। आस्थाऔ का मंदिर, बाजार हो गया। संतो का संतो से,तकरार हो गया। प्रतिदिन का स्वाँग रचाना व्यवहार हो गया। साई पर सन्तो का,पलतवार हो गया। गेरुआ रंग,शर्मसार हो गया। आस्थाऔ का मंदिर,बाजार हो गया। धर्म.. सादगी अब शृंगार हो गया। बाबा अब कलाकार हो गया। साधु के भेष मे डाकु, मालामाळ हो गया। भक्तौ के भावनाऔ से,खिलवार हो गया । आस्थाऔ का मंदिर,बाजार हो गया। धर्भ... स्त्रियो का मंदिर जाना,दूशवार हो गया। भक्तौ का भरोसा,तारतार हो गया।. जोगी के भेष मे भोगी,नेहाल हो गया। गुरु के हाथो शिश्याओ का,दूराचार हो गया। आस्थाऔ का मंदिर,बाजार हो गया। धर्म... आज कितनेआशा, निर्मल,राम,तैयार हो गया। फिर भी मंदिर मे आरती है,चमत्कार हो गया। लोजी"मनोज" कि कविता,तैयार हो गया। आस्थाऔ का मंदिर,बाजार हो गया। धर्म आज व्यापार हो गया। कृपा आज कारोवार हो गया। (c) कुमार मनोज 09871784593