Skip to main content

Posts

होली मेसन 2019

आलू का समोसा खाकर लालू गए जेल। पप्पू का सोना बनाने का फर्रमुला हो गया फैल।। जोगीरा सारा रारा,____'_

शेर

इश्क, मोहोबत, प्यार, वफा, सब मालूम पर जाते हैं!             जब सर के बचे खुचे बाल  जाते हैं।।

मुक्तक माला

मैं जन की बात करता रहा वो धन की बात समझती रही . मै गन की बात करता रहा वो रण की बात समझती रही . अब ओर उसे कैसे समझाता मै..... मै "मन की बात" करता रहा वो फन की बात समझती रही .  किया नहीं किया,तुझे पाने के वास्ते। क्या नही किया, तुझे मिल जाने के वास्ते। रात कि निन्द खोई दिन का चैन खोया.. एक बार गले लगाने के वास्ते। इस जमीन से, उस आसमान तक ! उस आसमान से,उस आसमान तक। जव देखता हूँ, जिधर देखता हूँ ! तेरा चेहरा दिखता है,उस आसमान तक। ना हम मंदिर भुले है। ना हम मस्जिद भुले है। कुछ भुले है अगर तो, काम का तहजिव भूले है। हमने भी कश्म खा ली थी। बेशक दिल्ली मे शर्दी भाडी थी। शर्दी को शर्दी माना तभी, जब केजरी ने मफलर डाली थी। मेरे तन मे है तू। मेरे मन मे है तू। तेरा क्या नाम दू, तूझमे हूँ मै मुझमे है तू। या खुदा तू ही बता क्या कसूर मेरा था! मैने उसे पाना चाहा था जो सिर्फ मेरा था। मेरा था या मेरे समझ का फेरा था। वो जो भी था जैसा भी था मेरा था। (c) कुमार मनोज 9871784593

26 कविता : आज का अर्जुन

अर्जुन ने कहा श्री कृष्ण से.. हे प्रभु आईये। जडा कलयुग मे भी रासलीला दिखाईये। श्री कृष्ण पाकर अर्जुन का संदेश, देखकर आधुनिक परिवेश। आगया उनमे आबेश, दिया अर्जुन को उपदेश।. ये क्या अर्जुन कलयुग मे, कैसी मैरी लीला कि तैयारी है? गोपिऔ के खुले बदन, गुवालाऔ पर कपडा भाडी है। सौच स्नान चारदिवारी मै, प्रेम आलिगंन खुले मे करने की तैयारी है? शादी ब्याह से परहेज करे यहाँ, यहाँ डेटिग सैटिग की मारामारी है। घौर आधुनिकता ये नर नारी हमे दिखाते है। नर से नर, नारी से नारी कैसा संबंध बनाते है। दाम्यपत जीवन मे कोई किसी का साथ नही निभाते है। पत्नि अपनी पति बदले, पति दुसरी पटाते है। डेटिग सैतिग की उपज ये, एबोसन करवाते है।. अपने कुल का कुलभुसन, अनाथालय से लाते है। कौन किसका माँ बाप, भाई बहन, कौन किसके सगे? पशु पक्षी जैसी जीवन शैली इसे ये आधुनिकता कहे। कहे "ठाकुरजी" अर्जुन से " क्यो मुझे ऐसी रासलीला करने बुलाया है" मेरी प्रेम की परिभाषा का तुमने गलत अर्थ लगाया है। धिकार है धिकार है धिकार है। हे मंगल च...

24 कविता : धर्म आज व्यापार हो गया।

धर्म आज व्यापार हो गया। कृपा आज कारौवार हो गया। आस्थाऔ का मंदिर, बाजार हो गया। संतो का संतो से,तकरार हो गया। प्रतिदिन का स्वाँग रचाना व्यवहार हो गया। साई पर सन्तो का,पलतवार हो गया। गेरुआ रंग,शर्मसार हो गया। आस्थाऔ का मंदिर,बाजार हो गया। धर्म.. सादगी अब शृंगार हो गया। बाबा अब कलाकार हो गया। साधु के भेष मे डाकु, मालामाळ हो गया। भक्तौ के भावनाऔ से,खिलवार हो गया । आस्थाऔ का मंदिर,बाजार हो गया। धर्भ... स्त्रियो का मंदिर जाना,दूशवार हो गया। भक्तौ का भरोसा,तारतार हो गया।. जोगी के भेष मे भोगी,नेहाल हो गया। गुरु के हाथो शिश्याओ का,दूराचार हो गया। आस्थाऔ का मंदिर,बाजार हो गया। धर्म... आज कितनेआशा, निर्मल,राम,तैयार हो गया। फिर भी मंदिर मे आरती है,चमत्कार हो गया। लोजी"मनोज" कि कविता,तैयार हो गया। आस्थाऔ का मंदिर,बाजार हो गया। धर्म आज व्यापार हो गया। कृपा आज कारोवार हो गया। (c) कुमार मनोज 09871784593

23 कविता :- रेलगाड़ी का सफ़र।

जब पायल छनक जाती थी। मन घायल कर जाती थी। तब उनकी नजरो से, मेरी नजर मिल जाती थी। लडकपन का एक, सफर था हमारा। सामने आकर बैठा, एक चेहरा प्यारा। हमारे बीच, रति भर की दूरी थी। अगर मै साँस भी लु,तो वो मैरी थी। कभी धरकने तेज होती, कभी मंद। मन मे हो रही थी, हुदहुदी सी जंग। तेज हवा उनके मुखरे से, जुल्फो को हिलाती थी। जुल्फे कभी न्यनो तो कभी गालो को सहलाती थी। कभी लालीदार होठो को छु जाती थी। कभी मेरे साँसो से लहराती थी। जुल्फो को बाँध रखी थी, खुबशुरत डोर से। तुम रिस्ते चलाने जाते. तो हाँ कह देते,मेरी ओर से। मुखरे की बात,कैसे बताऊँ?. दिल करता था,उसकी रोशनी मे,जीवन बिताउँ.।। चली गई अपनो के,हाथो मे डाले हाथ। खत्म हुआ,कुछ घन्टो का साथ। (C) कुमार मनोज  09871784593

22 कविता : विजय गीत गता रहूंगा

विजय गीत गाता रहँगा । यह तिरंगा लहराता रहँगा। निरंतर संर्घश का मार्ग चुना हुँ। चलता रहा हुँ, चलता रहुँगा। कल तक अनुदानो पर जीते थे। लाचारी का जहर पीते थे  आत्म निर्भर हो गये है हम, सीखा हमने स्वम उगाना। मौका नही देते हम किसी को, यू हिन्द का मखोल उडाना। हम नही भागते भौतिक सुख के पिछे। सब सुख है हमारे अधात्मिक सुख के निचे। पश्चिमी सभ्यता मे कहाँ असल है। वो स्वंम र्दुभावनाओ कि नकल है। किया अमेरिका चीन जापान, सब स्वाभिमान के साथ पुकारेगे। अब कभी हमे आँख नही दिखलायेगे। दिया अगर पाक को सह, इन सब पर तिरंगा फहरायेगे। (C) कुमार मनोज 09871784593